उद्देश्य
मेरी कुछ रचनाओं का संग्रह
मंगलवार, 8 जनवरी 2008
तेरे इश्क में ..
सिसकते चांद को थामा तो ये हालात हो गए,
ये आंखें गुल, ये ग़म शबनम, ये गेसू रात हो गए..
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