मंगलवार, 8 जनवरी 2008

तेरे इश्क में ..


सिसकते चांद को थामा तो ये हालात हो गए,
ये आंखें गुल, ये ग़म शबनम, ये गेसू रात हो गए..

सोमवार, 17 दिसंबर 2007

उनके लिए..

हंसी मैं , पिघल के मेरे ग़म सारे बह गए..
किया क्या, कि इस पल में बस हम ही रह गए..
हर इक शै में जो समां था, मेरा हो गया..
दे दिया जहाँ मुझको ,ये क्या वो कह गए..

तेरे बिन जो बीते दिन हैं,जाने किस तरह गए
फुरकत तेरी ये जाने, हम कैसे सह गए...
क़त्ल भी कर देते तो किस्सा तमाम था..
तेरे हाथ से जो बिखरे, मौसम वो रह गए..

बुधवार, 3 अक्टूबर 2007

आ तुझे कोई नाम दूँ..

घुल जाये जो कानों में..
एक हो सब जहानों में..
ना हो किसी का जैसा..
आ तुझे कोई नाम दूँ..


अकेली,प्यारी सूनी सी..
रमी हुई जो धूनी सी..
साथ को तरसे नहीं जो..
आ तुझे कोई शाम दूँ॥
तुझे कोई नाम दूँ..